28 मार्च 2009

अनन्‍त

अभिलाषाओ ने दी
जीवन को गति
मन की न रूकने वाली

ये अनन्‍त अभिलाषाये

जीवन की न थमने वाली

ये अनन्‍त गतियॉं
नित बनते नुतन सपने
सजती सपनो की डोली

हम देखते रह गये इस

अनन्‍त मझधार वाली नौका को
और बुनते रहे
उस पार जाने के सपने

न आया किनारा

न थमी अभिलाषाये

सपने भी बन्‍द नही हुये

डोली भी सजी रह गयी

गति चलती रह गयी

न रहा देखने वाला

वह विलीन हो गया

उस अनन्‍त में

जिसका कोई अन्‍त नही

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