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12 दिसंबर 2011

वेदना

वो दिल भी क्‍या जो तुमसे मिलने की दुआ न करे
मै तुमको छोउ के जिन्‍दा रहू खुदा न करे ।
रहेगा साथ तेरा प्‍यार जिनदगी बनकर
ये बात और मेंरी जिन्‍दगी वफा न करे
फलक पे आये सितारे तेरी सुरत बन के
 ये रात बीत न जाये कोर्इ दुआ न करे
 जमाना देख चुका है परख तुका है हमे
यतीम जान के काबे में इल्‍तजा न करे
हॅु खुसनसीब जो पाई है जुदाई तेरी
हमारी याद कभी तुमको बमजदा न करे








यादे

आप आये मेंरी यादो में खुदा खैर करे
नीद आती नही रातो में खुदा खैर करे
दिल के जजबात ने अंगडाई ली ऑसू बनकर
एक तुफान उठा आज खुदा खैर करे
बेवसी मन में उठी ऐसी दबाये न दबे
दिल ने फिर कर दिया फरियाद खुदा खैर करे
याद आये अब तेरी शीर्फ हकीकत बन कर
ख्‍वाबो ने कर दिया इनकार खुदा खैर करे










दर्द

खत डालिए हुजुर को आदाब बोलिए
आप आ रहे हैं आज बहुत याद बोलिए
तनहाई भरे दर्द का एहसास क्‍या लिखे 
आप अपने ही जख्‍मो की बस फरियाद बोलिए 
गर दर्द दबाये न दबे वेवफा है वो 
बस दर्द में डुबी हुयी एक बात बोलिए 
दर्द हद से गुजर जायेगा पानी बनकर 
अपने ऑखो में बसे दर्द की इबरात बोलिए  

तडप

राहत न सही दर्द की सौगात बहुत है ,
मेरे लिए एक पल की मुलाकात बहुत है।
मैं चॉदनी औ धूप का मोहताज नही हॅू,
मुझको तेरे जलवे की ए बरसात बहुत हैं।
मरने के लिए जहर जरूरी तो नही हैं ,
मुढको तेरी चुभती हुयी एक बात बहुत हैं,
अब और किसी सय की तमन्‍ना नही मुझको
हाथो में मेरे तुने दिया हाथ बहुत है ।

















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